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मंगलवार, 13 सितंबर 2016
रियो पैरालंपिक : गरीबी और शारीरिक बाधाओं को मात देकर मरियप्पन थंगावेलु ने स्वर्ण पदक जीता
रियो पैरालंपिक : गरीबी और शारीरिक बाधाओं को मात देकर मरियप्पन थंगावेलु ने स्वर्ण पदक जीता
रियो पैरालंपिक में इस स्पर्धा का कांस्य पदक भी भारत के वरुण भाटी की झोली में गया
फोटो क्रेडिट: एएफपी/यसुयोशी चीबा
रियो
ओलंपिक की तरह रियो पैरालंपिक में भारत को पदक के लिए ज्यादा इंतजार नहीं
करना पड़ा है. प्रतियोगिता के दूसरे दिन ऊंची कूद प्रतियोगिता में मरियप्पन
थंगावेलु ने स्वर्ण और वरुण भाटी ने कांस्य पदक जीता है. हालांकि, शरद
कुमार पदक लाने से चूक गए. इनकी जीत के साथ भारत भी पदकतालिका में शामिल हो
गया है. ब्राजील की राजधानी रियो डि जेनेरियो में ओलंपिक के बाद पैरालंपिक
की प्रतियोगिताएं चल रही हैं.
टी-42 वर्ग की प्रतियोगिता में
थंगावेलु ने 1.89 मीटर ऊंची छलांग लगाकर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया तो भाटी
1.86 मीटर की छलांग लगाने में सफल रहे. प्रतियोगिता का रजत पदक अमेरिकी
एथिलीट सैम ग्रीव के हिस्से आया, जिन्होंने भाटी के बराबर 1.86 मीटर छलांग
लगाई थी. थंगावेलु पैरालंपिक में ऊंची कूद में स्वर्ण पदक जीतने वाले
पहले भारतीय बन गए हैं. हालांकि, इस स्पर्धा में पहला पदक 2012 में एचएन
गिरीशा ने जीता था. पैरालंपिक में भारत को इससे पहले दो स्वर्ण पदक मिल
चुके हैं. 1972 में हीडलबर्ग में आयोजित पैरालंपिक में मुरलीकांत पेटकर ने
तैराकी में और देवेंद्र झाझरिया ने 2004 के एथेंस पैरालंपिक के दौरान भाला
फेंक में स्वर्ण पदक जीते थे.
मरियप्पन थंगावेलु गरीबी और शारीरिक
अक्षमता से लड़ते हुए इस मुकाम तक पहुंचे हैं. वे पांच साल के थे जब एक
सड़क हादसे में उनका पैर खराब हो गया था. उनकी मां आज भी सब्जियां बेचती
हैं जिससे उनके परिवार का गुजारा होता है. लेकिन अब उनकी जिंदगी बदलने जा
रही है. तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता ने थंगावेलु को दो करोड़ रुपये
का पुरस्कार देने की घोषणा की है. इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
ने भी ट्विटर पर दोनों विजेताओं को बधाई दी है. खेल मंत्रालय ने पहले ही
घोषणा कर दी थी कि पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को 75
लाख, रजत पदक पर 50 लाख और कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ी को 30 लाख रुपये
का ईनाम दिया जाएगा.
उत्तर प्रदेश के रहने वाले वरुण भाटी का एक पैर
पोलियो की वजह से खराब हो गया था. इन मुश्किलों के बावजूद 2014 में दक्षिण
कोरिया में आयोजित एशियन पैरालंपिक खेलों में उन्होंने पांचवां स्थान
हासिल किया. चाइना ओपन एथलीट्स चैंपियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता
था. अब यह कांस्य पदक उनकी नई उपलब्धि है.
टी-42 वर्ग की ऊंची कूद
प्रतियोगिता में उन खिलाड़ियों को भाग लेने का मौका मिलता है जिनका एक पैर
या तो घुटने तक हो या उनमें इसके बराबर की अपंगता हो. एनडीटीवी के मुताबिक
थंगावेलू और भाटी की सफलता के बाद सभी पैरालंपिक में भारत के पदकों की
संख्या दस पहुंच गई है, जिनमें तीन स्वर्ण, तीन रजत और चार कांस्य पदक
शामिल हैं. भारतीय पैरालंपिक समिति के उपाध्यक्ष गुरुशरण सिंह ने कहा,
'हमारे पास एफ-46 और एफ-47 वर्ग में भाला फेंक प्रतियोगिता में पदक जीतने
का अच्छा मौका है. हम स्वर्ण,रजत या कांस्य की उम्मीद कर रहे हैं. हम इन
खेलों में रिकॉर्ड बनाएंगे.'
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